कविता: रश्मिरथी से एक अंश
“खम्मि ठोक ठेलता है जब नर, पर्वत के जाते पाँव उखड़। मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है।”
कविता का अर्थ
इन पंक्तियों के माध्यम से दिनकर जी कहते हैं कि जब मनुष्य अपना पूरा संकल्प और साहस बटोरकर किसी बाधा का सामना करता है, तो बड़े-बड़े पर्वत (मुश्किलें) भी अपने स्थान से हिल जाते हैं। मनुष्य की इच्छाशक्ति में इतनी ताकत है कि वह कठोर से कठोर पत्थर जैसी परिस्थिति को भी पिघलाकर पानी (सुखद मार्ग) बना सकता है। यह कविता हमें सिखाती है कि कोई भी बाधा हमारे साहस से बड़ी नहीं है।
“When a man pushes with all his might,Even the mountains lose their footing and take flight.When humans apply their strength and will,Even the hardest stone turns into a liquid rill.”

